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केंद्र सरकार का बड़ा ऐलान: मेडिकल टूरिज्म के लिए बनेंगे पांच रीजनल हब, बायोफार्मा शक्ति पर 10 हजार करोड़ खर्च

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने भारत को वैश्विक चिकित्सा पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट भाषण के दौरान घोषणा की कि देश में चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पांच विशेष रीजनल मेडिकल हब विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही अगले पांच वर्षों में बायोफार्मा शक्ति कार्यक्रम के तहत 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इन्हें इंटीग्रेटेड हेल्थकेयर कॉम्प्लेक्स के रूप में विकसित किया जाएगा। इन हब में अत्याधुनिक मेडिकल सुविधाओं के साथ-साथ मेडिकल शिक्षा, रिसर्च और इनोवेशन को भी एक ही मंच पर जोड़ा जाएगा। केंद्र सरकार इन मेडिकल हब की स्थापना के लिए राज्यों को वित्तीय और नीतिगत सहयोग प्रदान करेगी।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत की स्वास्थ्य सेवाएं कम लागत और उच्च गुणवत्ता के कारण पहले से ही अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुकी हैं। नई योजना का उद्देश्य इसी ताकत को वैश्विक स्तर पर और मजबूती से पेश करना है, ताकि विदेशों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए भारत आएं। सरकार राज्यों के साथ मिलकर ऐसी व्यवस्था विकसित करेगी, जिससे विदेशी मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज, आधुनिक तकनीक और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं एक ही जगह उपलब्ध हो सकें।
बायोफार्मा शक्ति कार्यक्रम पर विशेष जोर
बजट में बायोफार्मा शक्ति कार्यक्रम को भी नई रफ्तार देने का ऐलान किया गया है। अगले पांच वर्षों में इस सेक्टर पर 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका मकसद दवाइयों, वैक्सीन, बायोटेक्नोलॉजी और रिसर्च से जुड़े क्षेत्रों को मजबूती देना है, ताकि भारत न केवल इलाज बल्कि दवा और मेडिकल इनोवेशन के क्षेत्र में भी वैश्विक नेतृत्व कर सके।
रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि इन मेडिकल हब के विकसित होने से विदेशी मुद्रा आय में इजाफा होगा और स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ, रिसर्चर्स और मेडिकल टूरिज्म से जुड़े अन्य सेक्टरों को इससे सीधा लाभ मिलेगा। यह योजना ‘हीलिंग इन इंडिया’ विजन को मजबूत करते हुए भारत को वैश्विक हेल्थकेयर डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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